श्रीडूंगरगढ़ :। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा और आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली खेजड़ी एक बार फिर विकास परियोजनाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के कितासर गांव में प्रस्तावित सोलर प्लांट के लिए कथित रूप से खेजड़ी के पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, कितासर गांव की रोही में सोलर परियोजना के लिए लीज पर लिए गए एक खेत में रविवार को करीब 15 खेजड़ी के पेड़ों को काट दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में चोरी-छिपे खेजड़ी के पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है।

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घटना की सूचना मिलते ही गांव के कई युवा मौके पर पहुंचे। युवाओं को आता देख पेड़ काटने में लगे लोग कटाई का सामान छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत जंभेश्वर संस्थान के पदाधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी।
गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, पर्यावरण और धार्मिक आस्था का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है। बीकानेर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में खेजड़ी संरक्षण को लेकर पहले भी बड़े आंदोलन हो चुके हैं तथा सरकार की ओर से संरक्षण के कई दावे और प्रावधान किए गए थे। हालांकि, लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में सोमवार सुबह वन विभाग के सहायक वन संरक्षक सतपाल सिंह ने बताया कि मामले की जांच के लिए विभागीय टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। टीम द्वारा मौका मुआयना और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए खेजड़ी की अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि पश्चिमी राजस्थान की इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।