Rajasthan

Rajasthan Board Result: फीस भरने को पैसे नहीं थे, प्राइवेट स्कूल से निकाला, मजदूर के बेटे ने पाए 99.80% अंक

टोंक: सफलता की सबसे ऊंची मीनारें अक्सर उन कंधों पर टिकी होती हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा बोझ सहा हो। राजस्थान के टोंक जिले (बड़ागांव) के रहने वाले सोनू मेहरा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जयपुर के वाटिका में रहकर पढ़ाई करने वाले सोनू ने 12वीं बोर्ड (विज्ञान-गणित) में 99.80% अंक हासिल कर पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। यह सिर्फ एक छात्र के नंबर नहीं हैं, बल्कि एक दिहाड़ी मजदूर पिता के फटे हुए हाथों और पसीने की जीत है।

पिता नहीं देख पाए स्कूल की दहलीज, बेटा बनेगा ‘साहब’

सोनू के पिता विनोद मेहरा इमारतों में रंग-रोगन (पेंट) का काम करते हैं। विडंबना देखिए, जो पिता दूसरों के घरों को रंगों से सजाता है, उसके अपने जीवन में आर्थिक तंगी का गहरा धुआं था। विनोद खुद 10वीं पास नहीं कर पाए थे, लेकिन उन्होंने कसम खाई थी कि गरीबी को बच्चों की पढ़ाई के आड़े नहीं आने देंगे।

प्राइवेट स्‍कूल की फीस भरने के पैसे नहीं थे

जानकारी के मुताब‍िक सोनू जब 8वीं में थे, तब उन्‍हें प्राइवेट स्‍कूल से न‍िकालना पड़ा था क्‍योंक‍ि फीस भरने के ल‍िए पैसा नहीं था। सोनू का एडम‍िशन सरकारी स्‍कूल में कराया गया और उन्‍होंने सफलता के झंडे गाड़ द‍िए।

गुरुओं का निस्वार्थ साथ और बहनों का संबल

सोनू की इस उड़ान में उसके पंख बने शिक्षक गणेश मीणा और बनवारी मीणा। उन्होंने सोनू की कुशाग्र बुद्धि को पहचाना और तीन साल तक बिना एक रुपया लिए उसे कोचिंग दी। आज जब नतीजे आए, तो शिक्षकों की आंखों में भी चमक थी। घर पर सोनू का अनुशासन ऐसा था कि वह खुद घंटों पढ़ता और अपनी बड़ी बहनों, किरण और शिवानी को भी पढ़ाता। बहनों का कहना है कि सोनू ने कभी सुख-सुविधाओं की मांग नहीं की, बस किताबों में ही अपनी दुनिया बसा ली।

अब UPSC टॉप कर सुधारेंगे सिस्टम

इतनी बड़ी कामयाबी के बाद भी सोनू के पैर जमीन पर हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपना विजन साझा किया। सोनू ने कहा, 99.80% तो बस एक पड़ाव है, मेरा असली लक्ष्य UPSC पास कर IAS ऑफिसर बनना है। मैं प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत करना चाहता हूं और एक ऐसी शिक्षा पद्धति लाना चाहता हूं जहां किसी भी ‘सोनू’ को गरीबी की वजह से पढ़ाई न छोड़नी पड़े।