राजस्थान बोर्ड के 10वीं-12वीं के एग्जाम रद्द, गहलोत कैबिनेट की बैठक में फैसला; दोनों कक्षाओं में 21.58 लाख से ज्यादा स्टूडेंट हैं

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श्री डूंगरगढ़ न्यूज ||अब राजस्थान में भी 10वीं और 12वीं के बोर्ड की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। गहलोत कैबिनेट की बैठक में मंथन के बाद बुधवार को यह फैसला लिया। इस बार दोनों बोर्ड की परीक्षाओं के लिए 21.58 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इसमें 10वीं में करीब 12 लाख व 12वीं में करीब साढे़ 9 लाख स्टूडेंट हैं।

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना को देखते हुए 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं नहीं करवाई जाएं। बैठक में बोर्ड परीक्षाओं को निरस्त करने के बाद रिजल्ट तैयार करने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि बोर्ड किसी आधार पर छात्रों के रिजल्ट तैयार करेगा। इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने राज्य सरकारों को बोर्ड परीक्षाएं टालने का सुझाव दिया था। प्रियंका गांधी के सुझाव के बाद माना जा रहा था कि गहलोत सरकार उसी के अनुसार फैसला कर सकती है।

6 मई से होनी थी परीक्षा, 14 अप्रैल को स्थगित की गई
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के टाइम टेबल के मुताबिक परीक्षाएं 6 मई से शुरू होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण 14 अप्रैल को ही परीक्षाएं स्थगित करने का फैसला किया था। 10वीं की परीक्षाएं 22 दिन यानी 27 मई तक चलती। वहीं, 12वीं की परीक्षाएं 24 दिन यानी 29 मई तक होनी थी। सभी परीक्षाओं के लिए समय सुबह 8.30 से 11.45 बजे रखा गया था।

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पिछले साल देरी से हुए थे बोर्ड एग्जाम, 3 लाख विद्यार्थी फेल हुए थे
2020 में बोर्ड एग्जाम कोरोना के कारण देरी से करवाए गए थे। 10वीं और 12वीं में शामिल होने वाले करीब तीन लाख विद्यार्थी पास नहीं हो पाए थे। 10वीं में 2 लाख 23 हजार 156 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होने के बावजूद फेल हुए। वहीं 12वीं आर्टस में 53 हजार 99, कॉमर्स में 1989 तथा विज्ञान में 19 हजार 73 विद्यार्थी फेल हुए। यानि 12 वीं कक्षा में कुल 74 हजार 221 विद्यार्थी पास नहीं हो सके। खास बात यह है कि परीक्षा में बैठने वालों के मुकाबले आवेदन करने वाले ज्यादा थे। इसके बावजूद परीक्षा में बैठने के बावजूद फेल होने वालों की कुल संख्या 2 लाख 95 हजार 577 रही। करीब 50 हजार विद्यार्थी ऐसे थे जो आवेदन कर परीक्षा में ही शामिल नहीं हुए थे।

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