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कुंतासर गाँव में प्रेरणादायी नेत्रदान | तीजादेवी सहू ने दिया रोशनी का अमूल्य उपहार

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श्री डूंगरगढ़ न्यूज़

कुंतासर गाँव की प्रतिष्ठित महिला तीजादेवी सहू, धर्मपत्नी सावंताराम सहू ने मरणोपरांत नेत्रदान कर मानवता और दान की अद्भुत मिसाल स्थापित की है। यह गाँव के इतिहास का एक प्रेरणादायी एवं भावुक क्षण बन गया है।

परिवार ने दी नेत्रदान की स्वीकृति

नेत्रदान की स्वीकृति उनके पुत्र पुरखाराम सहू एवं उनकी धर्मपत्नी किशनीदेवी सहित परिवार का समर्थन रहा।

साथ ही उनके पौत्र जगदीश, मुखराम, अमरचन्द, जयकरण सहू भी इस पुण्य कार्य के दौरान मौजूद रहे।

उनके पड़पौत्र दीपांशु, तेजस्व, नितिन, गगन, ध्रुव, मानव की उपस्थिति ने इस भावनात्मक क्षण को और भी विशेष बना दिया।

गाँव के गणमान्य लोग बने साक्षी

गाँव के अनेक पारिवारिक एवं गणमान्य लोग जैसे मालाराम, आशाराम, मेघाराम, मोहनराम, सुगनाराम, किशनाराम, आदुराम, मुनीराम, रावताराम आदि इस नेत्रदान के साक्षी बने।

प्राणनाथ हॉस्पिटल की टीम ने किया संग्रहण कार्य

नेत्रदान संग्रहण का कार्य प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की प्रशिक्षित टीम द्वारा अत्यंत संवेदनशीलता और दक्षता से किया गया।

इसमें डॉ. अंकित स्वामीमुखराम सहू की प्रेरणा तथा तेरापंथ युवक परिषद् श्रीडूंगरगढ़ के संयोजक अशोक झाबक, अध्यक्ष विक्रम मालू, उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल का विशेष योगदान रहा।

गाँव ने कहा— “मानवता की मिसाल”

पूरा गाँव इस कार्य को मानवता की बड़ी उपलब्धि बताते हुए भावुक हो उठा।

“तीजादेवी सहू का नेत्रदान दो ज़िंदगियों में नई रोशनी बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।”

नेत्रदान कब और कहाँ किया गया?
नेत्रदान कुंतासर गाँव में तीजादेवी सहू के मरणोपरांत प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की टीम द्वारा किया गया।
नेत्रदान का उद्देश्य क्या था?
मानवता की सेवा और दो ज़िंदगियों को नई रोशनी देना इसका मुख्य उद्देश्य था।
इस कार्य में परिवार की क्या भूमिका रही?
परिवार ने पूरी सहमति और भावुकता के साथ नेत्रदान को पूर्ण समर्थन दिया।
इस घटना से क्या प्रेरणा मिलती है?
यह घटना समाज को नेत्रदान जैसे महान कार्य के लिए जागरूक और प्रेरित करती है।