ग्राम पंचायत तो दूर जिला मुख्यालय पर भी नहीं मिलती लाभार्थी बीमा कृषकों की सूचना

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श्री डूंगरगढ़ न्यूज़ नागौर ।।कहने को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (पीएमएफबीवाई) किसानों को सहारा देने के लिए लागू की गई है, लेकिन इसका असली फायदा बीमा कम्पनियों को मिल रहा है। प्रीमियम के माध्यम से हर वर्ष बीमा कम्पनियों के खजाने में करोड़ों रुपए जमा हो रहे हैं, जबकि फसल खराबा होने के बावजूद बीमित किसानों को नाम मात्र का क्लेम दिया जाता है। पीएमएफबीवाई के अनुसार बीमा कम्पनी को लाभार्थी बीमा कृषकों का विवरण ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चस्पा करना होता है, लेकिन जिले में 20 फीसदी किसानों की सूचना भी चस्पा नहीं की जाती है और न ही सम्बन्धित विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान देते हैं। इसके साथ बीमा कम्पनी को ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर बीमा पॉलिसियों का वितरण करना होता है, लेकिन पिछले लम्बे समय से यह काम भी औपचारिकता के तौर पर किया जाता है।

प्रीमियम लेने का समय निर्धारित है तो क्लेम का क्या क्यों नहीं

अभिनव राजस्थान पार्टी के नागौर जिलाध्यक्ष हेमराज माली व जोधपुर जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र चौधरी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में राज्य सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कृषि (फसल बीमा) मुकेश कुमार माथुर ने बताया कि पीएमएफबीवाई भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप संचालित है। आरटीआई में यह पूछा गया कि जब प्रीमियम लेने का समय निर्धारित है तो क्लेम देने का समय निर्धारित क्यों नहीं है? इस पर माथुर ने गाइडलाइन में योजना के विभिन्न कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित होने की बात लिखकर औपचारिकता पूरी कर ली। इसके साथ क्लेम की पुख्ता जानकारी समय पर सार्वजनिक करने के सवाल पर भी संयुक्त निदेशक माथुर ने बताया इसकी सूचना ग्राम पंचायत मुख्यालय पर चस्पा की जाती है, जबकि धरातल पर ऐसा नहीं है।

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बैंकों का भी सहयोग नहीं

किसानों के खाते से बीमा प्रीमियम की राशि काटने के बावजूद कई किसानों की फसल का बीमा नहीं होता तो कई किसानों को सूचना तक नहीं दी जाती है। गोवा गांव के हरदीनराम गोलिया पिछले एक साल से कृषि विभाग, बैंक एवं प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, उनके खाते से प्रीमियम राशि काटने के बावजूद बीमा नहीं किया गया। जिले में ऐसे कई किसान हैं, जो प्रीमियम का भुगतान करने के बावजूद बीमा क्लेम से वंचित रह गए, जबकि कहीं बेमौमस बारिश से तो कहीं सूखे की वजह से फसल खराबा हुआ हुआ है।

 

सूचना चस्पा नहीं करते

फसल बीमा करने वाली कम्पनी ने अब किसी भी लाभार्थी किसान की सूचना ग्राम पंचायत में चस्पा नहीं की है। बीमा पॉलिसियां भी वितरित नहीं की जाती है, जिससे किसानों को यह भी पता नहीं रहता कि उनका बीमा हुआ है या नहीं।- विक्रम मातवा, सरपंच, इंदोखा (मकराना)

 

डेढ़ साल में तो कोई आया नहीं

पिछले डेढ़ साल में बीमा कम्पनी ने एक भी लाभार्थी किसान की सूचना ग्राम पंचायत में चस्पा नहीं की है और न ही बीमा पॉलिसियों का वितरण किया है। गत दिनों आयोजित हुए प्रशासन गांवों के संग शिविर में तो बीमा कम्पनी व बैंक का कोई प्रतिनिधि भी उपस्थित नहीं हुआ।- धर्मेन्द्र गौड़, सरपंच, भूण्डेल

 

क्लेम के लिए लगे शिविर

फसल बीमा योजना एक भ्रमजाल है जिसमें हर कदम पर किसान भटकता है। केवल प्रीमियम की राशि और उसको जमा करने की तिथि निश्चित है, जो कम्पनी के हित में है। फसल बीमा करवाने के समय जिस प्रकार अधिकारी रथ घुमाते हैं, वैसे ही क्लेम के समय किसानों के शिविर लगाने चाहिए। जनप्रतिनिधियों की इस मामले में चुप्पी खतरनाक है, जबकि उनको किसान हित में कम्पनियों पर दबाव डालना चाहिए। हमारी पार्टी इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी।

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डॉ. अशोक चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष, अभिनव राजस्थान पार्टी

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