“जल चेतना : चिंता और चिंतन’ संगोष्ठी इक्कीस एकेडमी में सम्पन्न।

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श्री डूंगरगढ़ न्यूज़ :लूणकरणसर, 13 अप्रैल। ‘पाणी तो पाताळ गैयो, रूंख गैया सै सूख, सांचै हिरदै झांक तो, कठै हुई आ चूक।’ की चिंता बुधवार को लूणकरणसर उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम गोपल्याण में स्थित इक्कीस एकेडमी फॉर एक्सीलेंस प्रांगण में नज़र आई।मौका था ‘जल चेतना :चिंता और चिंतन’ संगोष्ठी का। इस दौरान ‘पानी’ पर मंथन हुआ।

देश के कोनों को बाइक पर नापने वाले फेमस बाइकर एवं प्राध्यापक कान्हा शर्मा ने कहा कि जल के दुरुपयोग को रोकने के लिए विद्यार्थियों को भी जागरुक किया जाए तो उचित होगा। समाजसेवी रामप्रसाद पारीक और हेमाराम सारण ने जल के लिए जागृति की इस पहल को महत्ती बताया। मनीराम जाखड़ एवं शिवदत्त जाखड़ ने सभी उपस्थितजनों के साथ मिलकर जल सरंक्षण के लिए हर सम्भव प्रयास की बात कही।

"जल चेतना : चिंता और चिंतन' संगोष्ठी इक्कीस एकेडमी में सम्पन्न।
“जल चेतना : चिंता और चिंतन’ संगोष्ठी इक्कीस एकेडमी में सम्पन्न। (फोटो लोकेश कुमार बोहरा)

साहित्यकार डॉ.हरिमोहन सारस्वत एवं संस्था प्रधान राजूराम बिजारणियां ने घरों की छतों को कुंड से जोड़ने, बदहाल परम्परागत जल स्रोतों को संरक्षित करने सहित विभिन्न पहलुओं की ओर सबका ध्यान खींचा। व्याख्याता देवीलाल टांडी ने घरों में छोटी-छोटी सावचेती बरतकर जल बचाने की बात कही। इस अवसर पर हंसराज सारण, खींयाराम जाखड़,लालचंद जाखड़, रामलाल लुहार, रामकरण सारण, लेखराम गोदारा, गणपत राम, मनीराम सारण सहित उपस्थित ग्रामीणजनों ने सामुहिक रूप से जल सरंक्षण की शपथ ली।

इससे पूर्व विद्यार्थी आरती सारण, साक्षी सारण, रवीना बांगड़वा, संजय गोदारा, दुर्गा शर्मा, निर्मला शर्मा ने जल संरक्षण के विभिन्न तरीकों पर अपनी बात साझा की। संगोष्ठी के मध्यान्ह ‘जल जीवन आधार’ डॉक्यूमेंट्री का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। संस्थान अध्यक्ष आशा शर्मा, हरिसिंह कुमावत और संतोष ने आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया।

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कंटेंट : लूणकरणसर संवाददाता लोकेश कुमार बोहरा।

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