दिल्ली अग्निकांड के पीड़ितों का दर्द:‘मेरी बहन जिंदा है या आग में जलकर मर गई, कम से कम ये बता दो’, दर-दर भटक रहे परिजन

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इस्माइल खान की बहन मुस्कान दिल्ली के मुंडका की उसी बिल्डिंग में अकाउंटेंट थी, जहां शुक्रवार शाम को लगी आग में 27 लोगों की मौत हो गई। इस्माइल को अब तक ये नहीं पता है कि उसकी बहन जिंदा है या आग में जलकर मर गई। बहन की तलाश में उन्होंने 15 घंटे तक आसपास के हर अस्पताल का कोना-कोना छान मारा।

इस्माइल ने बहन मुस्कान की तलाश में आसपास के हर अस्पताल को छान मारा, लेकिन पता नहीं चल सका।
इस्माइल ने बहन मुस्कान की तलाश में आसपास के हर अस्पताल को छान मारा, लेकिन पता नहीं चल सका।
इस्माइल ने बहन मुस्कान की तलाश में आसपास के हर अस्पताल को छान मारा, लेकिन पता नहीं चल सका।

शाम को करीब साढ़े 4 बजे उसे मुस्कान का कॉल आया था, जिसमें मुस्कान ने बताया कि भयानक आग लग गई है, मुझे आकर बचा लो। इस्माइल भागते हुए 15 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचे। इस्माइल ने बिल्डिंग में चढ़ने की कोशिश की, वहां लगे कांच से हाथ लहूलुहान हो गए, लेकिन वह अंदर दाखिल नहीं हो पाए।

इस्माइल ने देखा कि क्रेन बिल्डिंग में फंसे लोगों को निकाल रही थी, इस्माइल को उम्मीद थी कि उसकी बहन भी बाहर आ जाएगी, लेकिन जो भी लोग बिल्डिंग से बाहर सुरक्षित निकले, उसमें मुस्कान नहीं थी। इस्माइल पूरी रात संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल के चक्कर काटते रहे गए। उनकी तलाश जारी है।

दर्जनों लोग अपनों की तलाश में मारे-मारे फिर रहे

मुंडका की इसी बिल्डिंग में शुक्रवार शाम को भीषण आग लगी, जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई।
मुंडका की इसी बिल्डिंग में शुक्रवार शाम को भीषण आग लगी, जिसमें 27 लोगों की मौत हो गई।

आउटर दिल्ली के मुंडका स्थित चार मंजिला इमारत में 13 मई को हुए भयानक अग्निकांड में 27 लोगों की मौत हो गई है। अब तक तक जान गंवाने वाले इन 27 लोगों के नाम जारी नहीं हुए हैं। घटनास्थल और अस्पतालों के बाहर इसी बिल्डिंग में काम करने वालों के परिजन भटक रहे हैं।

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करीब एक दर्जन परिजनों को अब तक ये नहीं पता चला है कि उनकी बहन, भाभी, भतीजी, ननद अभी कहां हैं। जिदा भी हैं या मर गईं। इस बिल्डिंग में CCTV कैमरे मैन्युफैक्चरिंग का काम होता था और इसमें ज्यादातर महिलाएं काम करती थीं। अग्निकांड के पीड़ितों में भी ज्यादातर महिलाएं ही हैं।

‘गर्लफ्रेंड का वीडियो कॉल आया था, लेकिन मैं कुछ नहीं कर सका’
इस्माइल की तरह संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल के बाहर हमें एक 20 साल का लड़का मिला। वह बदहवास सा अपनी गर्लफ्रेंड को तलाश रहा था। वह भी उसी बिल्डिंग में काम करती थी, जिसमें आग लगी थी। उसने बताया, ‘शाम 5 बजे के आसपास मेरी गर्लफ्रेंड का वीडियो कॉल आया। वो चिल्ला रही थी, यहां आग लग गई है मुझे बचा लो। मैं उसे हिम्मत देने के अलावा कुछ नहीं कर सका। जैसे ही फोन कटा में भागा-भागा मौके पर पहुंचा, लेकिन तब से अब तक मेरी गर्लफ्रेंड का कुछ पता नहीं चल सका है।’

‘जसोदा देवी 5-6 हजार रुपये कमाती थीं, आग लगने के बाद से लापता हैं’

रिंकू अपनी भांजी जसोदा की तलाश में 5 अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया है।
रिंकू अपनी भांजी जसोदा की तलाश में 5 अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया है।
रिंकू अपनी भांजी जसोदा की तलाश में 5 अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल पाया है।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले रिंकू कुमार की 35 साल की भांजी जसोदा देवी का आग की घटना के 8 घंटे बाद भी कुछ भी पता नहीं चल सका है। रिंकू 3-4 अस्पतालों के चक्कर काट चुके हैं और पुलिस वालों से भी पूछ चुके हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं बता रहा।

शाम को करीब 5 बजे रिंकू को पता चला कि कैमरा बनाने वाली उसी बिल्डिंग में आग लग गई है जहां उनकी भांजी काम करती है। रिंकू अब घटना स्थल के सामने अपनी भांजी का हाथ में फोटो लिए हुए खड़े हैं, ताकि कोई बता दे कि उनकी भांजी कहां हैं। रिंकू बताते हैं कि जसोदा देवी CCTV कैमरा बनाने वाली इस फैक्टरी में पिछले 3 साल से काम कर रही थीं और उन्हें करीब 5-6 हजार रुपए तनख्वाह मिलती थी।

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जिनके परिजन अग्निकांड वाली 4 मंजिला इमारत में काम करते थे, वो सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे जब अपने परिजन का मौके पर कोई पता ना चल सका तो परिजनों ने हॉस्पिटल के चक्कर काटने शुरू किए। घटनास्थल का दौरा करने के बाद हम भी संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचीं।

‘पहले ये बताओ मेरी बहन कहां हैं, कोई जवाब नहीं दे रहा’

मुन्नी अपनी ननद भारती की तलाश में रात भर घटनास्थल से अस्पतालों के चक्कर काटती रहीं।
मुन्नी अपनी ननद भारती की तलाश में रात भर घटनास्थल से अस्पतालों के चक्कर काटती रहीं।
मुन्नी अपनी ननद भारती की तलाश में रात भर घटनास्थल से अस्पतालों के चक्कर काटती रहीं।

हॉस्पिटल के बाहर बेंच पर बैठीं मुन्नी की आंखें नम थीं। मुन्नी की 45 साल की ननद भारती उसी बिल्डिंग में नौकरी करती थी, जहां आग लगी। अब तक भारती का कुछ पता नहीं है। भारती के भाई गौरव हताश हो चुके हैं, अपनी दास्तां अलग-अलग लोगों को बताते हुए उनका गला भर गया है। खीझकर वो कहते हैं, ‘आप मेरी बहन के बारे में जानकारी बाद में लेना, पहले ये बताओ कि वो कहा हैं। न हॉस्पिटल वाले बता रहे हैं, ना पुलिस बता रही है।’

संजय गांधी हॉस्पिटल के बाहर ही सलमान अंसारी अपनी 35 साल की मामी मुसर्रत की फोटो लिए लोगों से पूछ रहे हैं, ‘क्या इनके बारे में कुछ पता चला?’ मुसर्रत डेढ़ साल से उसी बिल्डिंग में बतौर हेल्पर काम कर रही थीं। सलमान बताते हैं कि उन्हें 5 बजे के आसपास पता चला कि बिल्डिंग में आग लग गई है, लेकिन अभी तक सलमान की मामी का कोई पता नहीं चल रहा है।’

हादसे का शिकार ज्यादातर महिलाएं
मुंडका की जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां ज्यादातर महिला कर्मचारी ही काम करती थीं और अग्निकांड के पीड़ितों में भी ज्यादातर महिलाएं ही हैं। घटना स्थल पर जब हम देर शाम पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बिल्डिंग में ज्यादातर महिलाएं काम करती थीं। घटनास्थल पर भी तमाम सैंडल्स बिखरी हुई हैं, जो तस्दीक करती हैं कि यहां ज्यादातर महिलाएं ही काम पर थीं।

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पुलिस के मुताबिक बिल्डिंग 80-100 लोग काम करते थे
दिल्ली पुलिस के एडिशनल CP वेस्ट समीर शर्मा ने भास्कर को बताया, ‘अब तक इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी की गई है। बिल्डिंग के मालिक की तलाश जारी है। हमने बिल्डिंग ऑपरेट करने वालों से डॉक्यूमेंट की कॉपी मांगी है, हमें पता चला है कि इस बिल्डिंग में 80-100 लोग काम करते हैं। हमारी जांच जारी है और हम जल्द ही और गिरफ्तारियां भी करेंगे।’

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