अब सस्ती मिल सकेगी बजरी! राज्य में साढ़े तीन साल बाद बजरी खनन का खुला रास्ता

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जयपुर। साढ़े तीन साल से राजनीतिक और कानूनी दांवपेच में फंसे बजरी खनन का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को तीन खानों के खनन पट्टे जारी कर दिए। इनमें एक खान बनास नदी और 2 खानें जालौर में दी गई है।खान विभाग का मानना है कि इन तीनों खानों में खनन शुरू होने से प्रदेश के लोगों की करीब 10 फीसदी मांग पूरी हो सकेगी। प्रदेश में एक मोटे अनुमान के मुताबिक 70 मिलियन टन बजरी की मांग है। यह तीनों बजरी खनन पट्टे 13 माह के लिए जारी किए गए है। इसके बाद इन खानों की पुन: नीलामी कर आवंटन किया जाएगा।प्रदेश में पहली बार बजरी खानों की नीलामी 2012-13 में की गई थी। तत्काल जरूरत को देखते हुए इन खानों में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से बिना पर्यावरण एनओसी के खनन चालू कर दिया गया था। इसके साथ ही तत्काल खानों के लिए एनओसी जारी कराने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन फिर भी पर्यावरण एनओसी खान संचालनों ने नहीं लिए तो करीब चार साल बाद इन खानों को बंद कर दिया गया था। जबकि नीलामी में यह खानें 5 साल के लिए दी गई थी।ऐसे में अब इन तीन खान संचालकों की ओर से पर्यावरण एनओसी लेने पर 5 साल में शेष बचे 13 माह के लिए खानें दी गई है। बताया जा रहा है कि हाल ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खान मंत्री प्रमोद जैन भाया और अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल को एनओसी प्राप्त कर चुके खनन लीज होल्डर को खनन पट्टे जारी करने के लिए कहा था।*ये जारी किए तीन खनन पट्टे*3797.58 हैक्टेयर की जालौर के सायला में रणवीर सिंह राठौड़ 5269 हैक्टेयर में जालौर के सत्यनारायण सिंह जादौन को1191.37 हैक्टेयर में भीलवाड़़ा के कोटडी में महेन्द्र सिंह राजावत

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