जानिए पादहस्तासन योग करने का सही तरीका, फायदे और सावधानियां योग गुरु ओम कालवा के साथ

नपुंसकता के उपचार में है मददगार

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श्री डूंगरगढ़ न्यूज़ || योग जीवन और प्रकृति का विज्ञान है।

यही कारण है कि जो प्रकृति में नहीं है वो योग में भी नहीं है। भारत के महान योग गुरुओं ने कठिन तपस्या के बाद बड़े परिश्रम से योग विज्ञान की रचना की है। ये महाविज्ञान पूरे शरीर को स्वस्थ बनाने वाला विज्ञान है।

योग में यम, नियम, आसन, प्राणायाम और संयम आदि विधियों से योगी के शरीर को स्वस्थ और सबल बनाया जाता है। इन नियमों में आहार और विहार की भूमिका पर भी व्यापक प्रकाश डाला गया है।

हजारों सालों से भारतीय ऋषि-मुनि इन्हीं आसनों और प्राणायाम के जरिए विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को स्वस्थ और सबल बनाते आए हैं। मनुष्य द्वारा किए गए भोजन के सही पाचन के लिए भी कई योगासन मुद्रा और प्राणायाम को करने की विधि बताई गई है।

पादहस्तासन (Padahastasana) भी योग विज्ञान का ऐसा ही आसन है। पादहस्तासन को अंग्रेजी में Intense Forward-Bending Pose, Intense Stretch Pose, Standing Forward Bend, Standing Forward Fold Pose, Standing Head to Knees Pose या Hand To Foot Pose भी कहा जाता है। ये आसन पूरे शरीर को अच्छी स्ट्रेच देता है और दिमाग में ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने में भी मदद करता है।

इसलिए इस आर्टिकल में मैं आपको पादहस्तासन योग क्या है, पादहस्तासन योग के फायदे, पादहस्तासन योग करने का सही तरीका, विधि और सावधानियों के बारे में जानकारी दूंगा।

क्या है पादहस्तासन?

पादहस्तासन संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है, पैरों को हाथों से छूने वाला आसन। इस आसन के अभ्यास से शरीर को कुछ गजब के फायदे होते हैं। ये आसन न सिर्फ आपके शरीर को हील करता है बल्कि नई जिंदगी भी देता है।

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पादहस्तासन के अभ्यास के समय सिर आपके दिल के नीचे होता है। इस वजह से रक्त का प्रवाह पैरों में होने की बजाय सिर की तरफ होने लगता है। इससे दिमाग में रक्त और ऑक्सीजन की अच्छी-खासी मात्रा पहुंचने लगती है।

इसके अलावा, पादहस्तासन मध्यम कठिनाई वाला हठ योग की शैली का आसन है। इसे करने की अवधि 15 से 30 सेकेंड के बीच होनी चाहिए। इसमें किसी दोहराव की आवश्यकता नहीं होती है। पादहस्तासन के अभ्यास से हिप्स, हैमस्ट्रिंग, और काव्स पर खिंचाव आता है जबकि घुटने और जांघें मजबूत हो जाती हैं।

फायदे

पादहस्तासन के अभ्यास से पूरी पीठ पर खिंचाव आता है। ये सिर से लेकर पैर तक पूरे हिस्से पर प्रभाव डालता है।

इस आसन का विस्तार शरीर में पीठ के निचले, मध्य और ऊपरी हिस्से तक है, गर्दन से आसन का प्रभाव सिर तक जाता है, फिर माथे तक, और भौंहों के बीच में समाप्त होता है। इस आसन के दौरान शरीर की मांसपेशियां और संयोजी ऊतक पूरे विस्तार में फैल जाते हैं।

भले ही आपको इस सारी क्रिया का अहसास न हो, लेकिन ये आपके शरीर के लिए वाकई बहुत बड़ा काम है। आपको इस आसन को करने से पहले शरीर को तैयार करना पड़ता है, इसलिए पादहस्तासन करने से पहले शरीर को वॉर्म-अप करना न भूलें।

ये आसन पीठ, हिप्स, पिंडली और टखनों को अच्छा स्ट्रेच देता है।
दिमाग को शांत करता है और एंग्जाइटी से राहत देता है।
सिरदर्द और इंसोम्निया की समस्या होने पर आराम देता है।
पेट के भीतरी पाचन अंगों को अच्छी मसाज देकर पाचन सुधारता है।
किडनी और लिवर को सक्रिय करता है।
जांघों और घुटनों को भी मजबूत बनाता है।
ये आसन हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, नपुंसकता, साइनोसाइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस को ठीक करता है।

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सही तरीका

शुरुआत में, इस आसन को करने के लिए जरूरी स्ट्रेच कर पाना आपको कठिन लग सकता है। इस आसन को आसान बनाने के लिए धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ें और कल्पना करें कि सैक्रम, पेल्विस के पिछले हिस्से में गहराई से म़ुड़ रहा है।

अब, अपनी टेलबोन और प्यूबिस के बीच की दूरी को कम करें। जैसा कि आप प्रतिरोध महसूस करने लगें तब, अपनी जांघों के ऊपरी भाग को पीछे धकेलें और अपनी एड़ी को नीचे दबाएं। अपने घुटनों को सीधा करें। सुनिश्चित करें कि जब आप उन्हें सीधा करते हैं तो आप अपने घुटनों को लॉक नहीं करते हैं।

विधि

योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथ हिप्स पर रख लें।
सांस को भीतर खींचते हुए घुटनों को मुलायम बनाएं।
कमर को मोड़ते हुए आगे की तरफ झुकें।
शरीर को संतुलित करने की कोशिश करें।
हिप्स और टेलबोन को हल्का सा पीछे की ओर ले जाएं।
धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं और दबाव ऊपरी जांघों पर आने लगेगा।
अपने हाथों को पैर के पंजे के नीचे दबा लें।
आपके पैर एक-दूसरे के समानांतर रहेंगे।
आपका सीना पैर के ऊपर छूता रहेगा।
सीने की हड्डियों और प्यूबिस के बीच चौड़ा स्पेस रहेगा।
जांघों को भीतर की तरफ दबाएं और शरीर को एड़ी के बल स्थिर बनाए रखें।
सिर को नीचे की तरफ झुकाएं और टांगों के बीच से झांककर देखते रहें।
इसी स्थिति में 15-30 सेकेंड तक स्थिर बने रहें।
जब आप इस स्थिति को छोड़ना चाहें तो पेट और नीचे के अंगों को सिकोड़ें।
सांस को भीतर की ओर खींचें और हाथों को हिप्स पर रखें।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठें और सामान्य होकर खड़े हो जाएं।

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पादहस्तासन करने से पहले ध्यान रखने वाली बातें (Important Notes)
पादहस्तासन का अभ्यास सुबह के वक्त ही किया जाना चाहिए।
आसन के समय से कम से कम 4 से 6 घंटे पहले भोजन कर लें।
आसन करने से पहले आपने शौच कर लिया हो और पेट एकदम खाली हो।
पादहस्तासन करने में क्या सावधानी बरती जाए

अगर आपको निम्नलिखित समस्याएं हैं तो पादहस्तासन का अभ्यास करने से बचें।

निचली कमर में चोट (Lower Back Injury)
हैमस्ट्रिंग में खिंचाव (Tear In The Hamstrings)
साइटिका (Sciatica)
ग्लूकोमा या मोतियाबिंद (Glaucoma)
शुरुआत में पादहस्तासन को योग ट्रेनर की देखरेख में ही करें।
संतुलन बनने पर आप खुद भी ये आसन कर सकते हैं।
पादहस्तासन, योग विज्ञान का बहुत अच्छा आसन है। पादहस्तासन का अभ्यास करने के लिए आपके पैर और क्वा​ ड्रीसेप्स इतने मजबूत होने चाहिए कि पूरे शरीर का वजन उठा सकें। लेकिन सबसे पहले आपको अपने मन के डर पर जीत हासिल करनी होगी कि, कहीं आप अभ्यास करते हुए गिर न पड़ें।

अगर गिर भी जाएं तो गहरी सांस लें और कोशिश के लिए अपनी तारीफ करें और दोबारा अभ्यास करें। शुरुआती दौर में इस आसन को करने के लिए किसी योग्य योग शिक्षक से मार्गदर्शन जरूर लें।

योग गुरु ओम कालवा
( संरक्षक )
राजस्थान योग शिक्षक संघर्ष समिति
mob.9799436775

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